बजट सत्र के दूसरे दिन सत्तापक्ष और विपक्ष द्वारा पूछे गये प्रश्नों को सीधा उत्तर देने में विफल रहे संबंधित विभागों के मंत्री, सीपी सिंह ने कहा स्पीकर सदन के कस्टोडियन, वे मंत्रियों से दिलवाएं सदस्यों के प्रश्नों के सही उत्तर
झारखण्ड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज दूसरे दिन चल रहे सदन के अंदर प्रश्नकाल में अल्पसूचित प्रश्न, तारांकित प्रश्न व ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में आये प्रश्नों और उन प्रश्नों के उत्तर में मंत्रियों द्वारा दिये जा रहे जवाब से सदन में बैठे माननीय सदस्यों को बहुत ही निराशा हुई। निराशा उन पत्रकारों को भी हुई, जो प्रेस दीर्घा या प्रेस कक्ष में बैठकर माननीयों द्वारा पूछे जा रहे सवाल और उनके मिल रहे उत्तर को सीधा देख रहे थे। शायद यही कारण रहा कि कभी पूर्व स्पीकर रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता सीपी सिंह ने यहां तक कह दिया कि स्पीकर सदन के कस्टोडियन होते हैं, इसलिए स्पीकर का दायित्व हो जाता है कि वे सदन के सदस्यों के प्रश्नों के सही उत्तर संबंधित मंत्रियों से दिलवाने का प्रयास करें।
दस मिनट विलंब से प्रारंभ हुए आज सदन में अल्पसूचित प्रश्न से चार ही प्रश्न लिये गये, जबकि तारांकित प्रश्नों में से छः प्रश्न के ही जवाब सदन पटल पर मिले, वो भी असंतोषजनक थे। राजनीतिक पंडितों की मानें तो मंत्रियों को चाहिए कि वे आनेवाले प्रश्नों के सही उत्तर की सही तैयारी पूर्व में ही कर लें, तो ज्यादा बेहतर होगा। लेकिन ऐसा लगता है कि मंत्रियों ने प्रयास करने की कोशिश नहीं की और न आनेवाले समय में ऐसा उनके द्वारा होने की कोशिश होगी।
प्रश्न सत्तापक्ष के लोगों द्वारा किये जा रहे हो या विपक्ष के द्वारा सभी ओर से असंतोष देखा गया। सत्तापक्ष के समीर मोहंती जिनका प्रश्न झारखण्ड अधिविद्य परिषद् द्वारा शिक्षकों के लिए डी. इएल. इडी का प्रशिक्षण से संबंधित था या ध्यानाकर्षण के दौरान झामुमो के मुख्य सचेतक मथुरा महतो का सीधा सा सवाल कि खनिज में क्या-क्या आता है, इस प्रश्न का उत्तर भी मंत्री को देने में पसीने छूट गये।
प्रश्नकाल के दौरान नवीन जायसवाल द्वारा बालू की समस्या को लेकर सवाल उठाया गया, जिस पर सीपी सिंह ने तो मंत्री की बोलती ही बंद कर दी, जब उन्होंने सीधा सा सवाल दागा कि उन्हें दो हाइवा बालू चाहिए, इसके लिए मुझे कहां पैसा जमा करना होगा, कब तक उनका काम हो जायेगा, बता दीजिये। मंत्री सही उत्तर नहीं दे सकें। सीपी सिंह ने अपने लिए सवाल पूछा था लेकिन ये प्रतीक उन सारे झारखण्ड के नागरिकों के लिए था, जो अपना घर बालू की किल्लत के कारण नहीं बनवा पा रहे।
सीपी सिंह ने तो यहां तक पूछ डाला कि जिलावाइज कितने गरीबों का प्रधानमंत्री आवास या राज्य सरकार द्वारा चलाये जा रहे अबुआ आवास के लिए फ्री बालू मिला है, सरकार बताएं। पूर्व नगर विकास मंत्री रह चुके सीपी सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि जब-जब हेमन्त सरकार आती है, बालू की समस्या बढ़ जाती है। वे ऐसा 2013 से देख रहे हैं।
कोयला निकालने के क्रम में राज्य के विभिन्न गांवों-कस्बों में विस्फोट कराये जा रहे हैं। जिससे लोगों के घरों में दरारें पड़ रही हैं। ये सवाल था कांग्रेस पार्टी के सुरेश बैठा का। लेकिन इसको लेकर धनबाद के विधायक राज सिन्हा भी मुखर हो उठे। उनका कहना था कि उनके इलाके में भी ऐसा हो रहा है। यही बात मनोज यादव ने भी कही तथा सभी ने सरकार से इसके लिए एक राज्यस्तरीय जांच कमेटी बनाने की मांग कर डाली। लेकिन विभागीय मंत्री ने उनकी एक बातें नहीं मानी।
कुल मिलाकर आज की प्रथम पाली नीरस रही। हालांकि सदन शुरु होते ही किन्हीं बातों को लेकर भाजपा के सारे विधायक हंगामा करते हुए वेल में आ गये। लेकिन जल्द ही मसला लगता है, सुलझ गया। जबकि दूसरी ओर सदन शुरु होने से पहले भाजपा विधायकों ने पोर्टिकों में मैट्रिक परीक्षा पेपर लीक को लेकर नारेबाजी की, प्रदर्शन किया, ये अपने साथ तख्तियां भी लिये हुए थे।