अपनी बात

कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने अपनी ही सरकार के खिलाफ आंखे तरेरी, मंत्रियों के उत्तर से अंसतुष्ट उन्होंने सदन में सरकार को दिया जवाब – खोदा पहाड़ निकली चुहिया, फिर कहा सरकार हठधर्मिता कर रही

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के साथ सत्ता का स्वाद चख रही कांग्रेस और उसके विधायक दल के नेता सदन में अपनी ही सरकार को चुनौती भी दे रहे हैं और आंखे भी दिखा रहे हैं। लेकिन आश्चर्य है कि कांग्रेस और उनके विधायकों के उक्त चरित्र पर झामुमो भी कुछ बोलने से बच रहा हैं। आखिर यह क्यों हो रहा हैं, कोई बोल क्यों नहीं रहा? यह समझ से परे हैं। सच्चाई यह भी है कि यह सब करने का मौका, कांग्रेस और कांग्रेस विधायक दल के नेता को, झामुमो के विधायक दल के नेता व राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और कल्पना सोरेन की वजह से ही मिला है।

नहीं तो, आज जिनकी आवाज सदन में निकल रही हैं, वो कभी सदन में ही नहीं पहुंच पाते, क्योंकि उन्हें सदन में लाने में हेमन्त सोरेन और कल्पना सोरेन को कम मेहनत नहीं करनी पड़ी हैं। आज कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने सदन में सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक प्रश्न के उत्तर के जवाब में साफ कहा कि खोदा पहाड़ निकली चुहिया और दूसरे प्रश्न के सवाल-जवाब में एक मंत्री के प्रत्युत्तर में साफ कह दिया कि वे हठधर्मिता नहीं, बल्कि सरकार हठधर्मिता कर रही हैं।

भाजपा मरी हुई विपक्ष की तरह सदन में काम कर रही

अर्थात् हम खुलकर कह सकते हैं कि जो काम सदन में विपक्षी भाजपा के विधायकों को करना चाहिए, वो काम वर्तमान में सदन में कांग्रेस और कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने ले लिया है। भाजपा तो मरी हुई विपक्ष की तरह सदन में काम कर रही हैं। उसके नेताओं का समूह अभी तक किसी भी सवाल पर सरकार को घेरने में सफल नहीं रही हैं। जबकि उसको कई मौके मिले, वो सरकार को घेर सकती थी, सरकार से जवाब मांग सकती थी। लेकिन, यहां तो स्थिति ही दूसरी है।

आज जैसे ही सदन छः मिनट विलम्ब से शुरु हुआ। स्पीकर रवीन्द्र नाथ महतो ने प्रश्नकाल के दौरान प्रदीप यादव का नाम पुकारा। प्रदीप यादव का ये सवाल एक सप्ताह पूर्व स्थगित किया गया था, जिसका जवाब आज मिलना था। सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री योगेन्द्र महतो ने वो ही बात दुहराई, जो वे पूर्व में कह चुके थे। कोई नयापन नहीं था।

जबकि एक सप्ताह पूर्व प्रदीप यादव की मांग थी कि जिस भ्रष्टाचार के आरोप में संतोष कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई, आखिर उसी आरोप में कार्यपालक अभियंताओं पर सरकार ने प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की? सरकार उसे बचाने का प्रयास क्यों कर रही है? सरकार ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया। मतलब वहीं जवाब जो पूर्व में सरकार ने दी थी। उसे ही रखा। जिसको लेकर प्रदीप यादव ने नाराजगी दिखाई। गंभीर टिप्पणियां की।

कह दिया- खोदा पहाड़ निकली चुहिया। जिस पर हस्तक्षेप करते हुए अन्य मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि इस पर ज्यादा कुछ कहने की जरुरत नहीं हैं, जो मंत्री ने जवाब दिया हैं, वो सही हैं, कृपया हठधर्मिता इस पर न हो। प्रदीप यादव ने तुरन्त जवाब दिया कि वे हठधर्मिता नहीं कर रहे हैं, बल्कि सरकार हठधर्मिता कर रही हैं।

ज्ञातव्य है कि एक सप्ताह पूर्व स्वर्णरेखा परियोजना के अधीन शीर्षकार्य प्रमंडल में फर्जी खाता खोलकर करोड़ों रुपये के अवैध निकासी का मामले पर सदन गरमाया था। जिसमें कई माननीयों ने अपनी बातें रखी थी और सरकार से मांग की थी कि कार्यपालक अभियंताओं पर भी प्राथमिकी हो। लेकिन उस वक्त भी सरकार इनकी बातें नहीं मानी और आज भी नहीं मानी। सरकार का कहना था कि जो जांच चल रही हैं। उस जांच में जो भी बातें आयेगी। उसी पर कार्रवाई होगी, जो भी जांच के लपेटे में आयेगा, वो दंडित होगा।

आज इसी मामले में कांग्रेस के ही पूर्व वित्त मंत्री रह चुके रामेश्वर उरांव ने कहा कि सारा सदन जानता है कि वे संयुक्त बिहार में एक बार सीआईडी के चीफ भी रह चुके हैं। इस सीआईडी जांच में होता क्या है? तीन ही काम होता है, फंसाओं, धंसाओ या दूध का दूध पानी का पानी कर दो। लेकिन ये दूध का दूध, पानी का पानी तभी होता हैं, जब जिम्मेदार लोग सही हो।

हम सरकार को हाथ पकड़कर काम तो करवा नहीं सकते

प्रदीप यादव ने कहा कि आश्चर्य है कि जेल में बंद संतोष कुमार द्वारा दिये गये 27 पेज के स्पष्टीकरण में साफ इंगित है, प्रमाणिक दस्तावेज है, फिर भी सरकार उन कार्यपालक अभियंताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं करवा रही। संतोष ने जो तथ्य दिये हैं, वो भयावह और गंभीर है। इसलिए वो कहते हैं कि भ्रष्टाचार पर रोक लगाइये, नहीं तो यह चलता रहेगा, हम सरकार को हाथ पकड़कर काम तो करा नहीं सकते, इसलिए सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।

आश्चर्य यह भी रहा कि इतने गंभीर मुद्दे पर सदन चल रहा था और सदन में कुछ माननीय इस दौरान भी पूर्व की तरह मोबाइल यूज करने में व्यस्त रहे, जो मोबाइल यूज करने में व्यस्त रहे। उन विधायकों के नाम इस प्रकार है – जयराम महतो, श्वेता सिंह, अनूप सिंह, भूषण बाड़ा, सुरेश बैठा, ममता देवी, प्रदीप प्रसाद आदि।

ई-रिक्शा की कागजी खरीदारी पर लीपापोती बर्दाश्त नहीं करेंगे

दूसरी ओर प्रदीप यादव के ही एक सवाल पर जो पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से जुड़ा था। प्रदीप यादव ने पूछा कि क्या यह बात सही है कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण चरण – दो में कार्यपालक अभियंता एवं अन्य अभियंताओं को ठेकेदार से मिलीभगत कर 4355 पंचायतों मैन्युअल एवं ई-रिक्शा की कागजी खरीदारी की गई, जिस फर्जी खरीदारी की पुष्टि भी हो चुकी है।

मंत्री इस सवाल के जवाब का भी संतोषजनक उत्तर नहीं दे सकें। जिस पर प्रदीप यादव ने कहा कि जो पहले जांच हुई, उस जांच की रिपोर्ट को सरकार सार्वजनिक क्यों नहीं करती, दिक्कत कहां हैं? सरकार इस पूरे प्रकरण की जांच मुख्यसचिव स्तरीय जांच कमेटी से क्यों नहीं करवाती?

प्रदीप यादव ने कहा कि वे लीपापोती नहीं होने देंगे, आप पूर्व की जांच को सदन के पटल पर रखें। मंत्री द्वारा यह कहे जाने पर कि विभाग इस घोटाले की जांच को देख रहा हैं। प्रदीप यादव का जवाब था कि जब विभाग इस मामले को देख ही रहा था तो फिर उन्हें इस सदन में प्रश्न लाने की जरुरत ही क्या थी? अब जब सवाल सदन में आ गया तो मंत्री कह रहे हैं कि पहले की जांच रिपोर्ट का अवलोकन करेंगे फिर सार्वजनिक करेंगे।

पदाधिकारियों का समूह मंत्री को गुमराह कर रहा, भ्रष्ट संवेदक को बचा रहा

उधर तारांकित प्रश्न के दौरान अमित महतो ने सरकार से सवाल पूछा कि सिल्ली विधानसभा अंतर्गत बामलाडीह पुल सोनाहातु-तमाड़ को जोड़ता हैं, वो उद्घाटन के पूर्व ही कैसे टुटकर गिर गया? जो संवेदक ऐसे पुल बनाता है, जो बार-बार टुटकर गिर जाता है, वैसे संवेदक को काली सूची में न डालकर, उससे बार-बार काम लिया जा रहा है। क्या ये भ्रष्टाचार नहीं है।

जिस पर मंत्री दीपिका पांडेय ने उन्हें अपने जवाबों से संतुष्ट करने की कोशिश की, जिस पर अमित महतो ने प्रत्युत्तर में कहा कि मंत्री ही जवाब दें कि क्या वो जो उत्तर दे रही हैं, उस उत्तर से वो संतुष्ट हैं। अमित महतो ने बार-बार सवाल किया कि आखिर संवेदक को बचाने की कोशिश क्यों हो रही हैं? जिस संवेदक से पैसे वसूलने चाहिए, उस पर मेहरबानी क्यों हो रही हैं?

अमित महतो के इस सवाल पर कई विधायकों ने भी मंत्री को घेरने की कोशिश की। अरुप चटर्जी ने कहा कि जिस पर सात साल पहले जांच कमेटी बनी, उस जांच कमेटी के रिपोर्ट का क्या हुआ? उस जांच कमेटी के रिपोर्ट के बाद भी उसे काम क्यों दिया जा रहा है? अमित महतो ने कहा कि इसके लिए पदाधिकारी दोषी हैं और पदाधिकारी मंत्री को गुमराह कर रहे हैं।

एसपीटी की समीक्षा के लिए बनी कमेटी में कानून एक्सपर्ट और जनप्रतिनिधियों को भी रखा जाये

ध्यानाकर्षण सूचना शुरु होने के पूर्व नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य सरकार ने एसपीटी की समीक्षा के लिए जो आयुक्त की एक कमेटी बनाई है। वो प्रशंसनीय है। उक्त कमेटी में समाहर्ताओं को रखा गया है। यह भी सही है। लेकिन उनका सुझाव रहेगा कि उसमें कानून एक्सपर्ट भी रखे जाये, साथ ही जनप्रतिनिधियों को भी रखा जाये। ताकि सही में, उसका फलाफल निकले। मंत्री दीपक बिरुआ ने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के सुझावों पर विचार करने की हामी भरी।

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