राजनीति

सदन में सरकार के सामने सीपी सिंह ने टोकाटोकी के बीच पुरुषार्थहीन झारखण्ड पुलिस की असली तस्वीर पेश कर दी, जमकर बोले, प्रमाण के साथ बोले, क्या बोले? उसके लिए ये समाचार पढ़ना आपके लिए जरुरी हैं

झारखण्ड विधानसभा में आज गृह विभाग के बजट पर हो रही चर्चा में शामिल होकर भाजपा के वरिष्ठ नेता सीपी सिंह ने साफ कहा कि आज की झारखण्ड की स्थिति बहुत ही भयावह है। पुलिस को संविधान का अभेद्य कवच होना चाहिए था। आज यह भ्रष्टाचार की चिता पर जल रही है। गृह विभाग जो इस धरती का प्रहरी होना चाहिए था। आज अपराधियों के अधीन होकर नाचता है। पुलिस कठपुतली की तरह है, जिसका डोर माफियाओं के हाथों में हैं।

सीपी सिंह ने कहा कि यहां की नदिया सोना बहाती है। जंगल रहे स्वप्न बूनते हैं। लेकिन सड़कों पर खून की नदियां उफन रही है। गांव में डर का काला बादल छाया हुआ है। झारखण्ड बनने से क्या हो गया? आज भी वहीं वर्दी जूल्म ढाती है। बालू माफियाओं के लिए रास्ता खोलती है। ड्रग माफियाओं के लिए कालीन बिछाती है। नक्सलियों के सामने घूटने टेकती है। महिलाओं की चीत्कार थानों की दीवारों से टकराकर लौट आती है। आदिवासियों की जमीन छीन रही हैं। पुलिस के जवान लाचार हैं। न हथियार हैं। न समाधान हैं। न संसाधन हैं, न सामान हैं। क्या ये वही झारखण्ड है, जिसके लिए सिदो कान्हू और बिरसा मुंडा ने अपना जीवन त्यागा।

सीपी सिंह ने कहा कि गृह विभाग का बजट कोई कागज का खेल नहीं हैं। यह उस मां की अंतिम प्रार्थना है, जो अपनी बेटी को दरवाजे तक छोड़ते हुए कांपती है। वह उस किसान की आखिरी पुकार है, जो अपने जमीन को माफियाओं के पंजे से बचाने के लिए अपना खून बहाता है। यह उस जवान की अंतिम सांस है, जो नक्सलियों की गोली से शहीद होता है। क्योंकि उसके पास न तो हथियार है, न ही सुरक्षा, न सरकार का साथ। 2000 में झारखण्ड ने स्वप्न देखा था। हर एक सांस आजादी का हो। शांति का हो। लेकिन आज सरकार उस स्वप्न को कुचल रही है।

बिहार में जब कुणाल जी अफसर थे, तो लालू जी थर-थर कांपते थे

सीपी सिंह ने कहा कि बहुत पहले एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें बताया था कि पुलिस का मतलब क्या होता है? उसने कहा था कि पु का मतलब पुरुषार्थी, लि का मतलब लिप्सारहित और स का मतलब सहयोगी होता है। हमारी पुलिस पुरुषार्थी है। लेकिन लिप्सारहित है या नहीं, ये मैं नहीं जानता। सहयोगी है या नहीं, ये सरकार के लोग बतायेंगे। उन्होंने कहा कि बिहार में जब कुणाल जी अफसर थे। तो लालूजी थर-थर कांपते थे। बहुत प्रयास किया। उन्होंने शहाबुद्दीन को मंत्री बनवाया और प्रयास किया कि उनको डाउन किया जाये।

लेकिन उस व्यक्ति ने वर्दी पर आंच नहीं आने दिया। जब सीपी सिंह ने यह बातें कही तो संसदीय कार्य मंत्री सुदिव्य सोनू ने आसन से कहा कि चूकिं लालू जी इस सदन में नहीं हैं, इसलिए उनका नाम लेना उचित नहीं। सीपी सिंह ने कहा कि चलिए, आपके वक्तव्यों के अनुसार उनका नाम नहीं लेता हूं और पूर्व में कहे गये शब्दों को वापस लेता हूं। लेकिन वैसे भी वे परेशान है। ईडीवाला पूछताछ कर रहा है। मैंने किसी का नाम नहीं लिया। ईडीवाला घंटों हमेशा पूछताछ कर रहा है और अकेले उन्हीं का नहीं कर रहा। उनके बेटे और बेटियों का भी कर रहा है। लगता है पूरे खानदान का करेगा।

सीपी सिंह ने कहा कि नो डाउट हमारी पुलिस पुरुषार्थी है। इसमें किसी को डाउट नहीं होना चाहिए। लेकिन झारखण्ड सरकार ने उसे ऐसा बना दिया कि उसका पुरुषार्थ ही समाप्त हो गया। रांची का एसएसपी पुरुषार्थ दिखाते हुए शांति समिति की बैठक में कहता है कि होली की हुड़दंग करते हुए जो पाया जायेगा, उसे वो दस फीट जमीन के नीचे गाड़ देगा। लेकिन उसका पुरुषार्थ उस वक्त कहां चला जाता है, जब हिंदपीड़ी में एक बच्ची के साथ बलात्कार हो जाता है। अरे वैसे बलात्कारियों को दस फीट नहीं सहीं, पांच फीट नीचे तो अंदर गाड़ दो।

सीपी सिंह ने कहा कि हमारी मां-बहनों के गले से चैन की छिनतई हो रही है। उस वक्त इनका पुरुषार्थ कहां चला जाता है? कहां चला जाता हैं, इनका पुरुषार्थ जब सरेआम गोली मार दी जाती है? अरे पुरुषार्थ देखना हैं तो उत्तर प्रदेश में देखों। वहीं पुलिस जो समाजवादी पार्टी के समय थी, योगी की सरकार में कमाल दिखा रही है। जिस संभल में 40 वर्षों से होली नहीं खेला गया था। आज वहां होली खेली गई। पुलिस का भय होना चाहिए कि कोई कितना भी बड़ा होगा, वो कानून से नपेगा। लेकिन यहां तो गजब की स्थिति है।

सीपी सिंह ने कहा कि जब हेमन्त जी जेल यात्रा से लौटे तो पारसनाथ पूजा के लिए गये। उनके साथ और लोग भी गये। लेकिन वहां हुआ क्या? जो उनके साथ गये थे। वहां की पुलिस ने उनके उपर केस कर दिया। अब ये बात समझ नहीं आ रही कि सीएम पूजा करने गये, उनके साथ लोग भी गये, तो इनके खिलाफ केस करने का क्या औचित्य है? हमारे पास सारे कागजात मौजूद हैं। मैं जो कहुंगा, सच कहुंगा, सच के सिवा कुछ नहीं कहुंगा।

सीपी सिंह ने कहा कि अतिक्रमण के नाम पर ये पुलिसवाले एक विशेष क्षेत्र में जाकर पुरुषार्थ दिखाने का काम करते हैं। लेकिन दूसरे क्षेत्र में उनका पुरुषार्थ कहां चला जाता है? समझ में नहीं आता। वहां ये शिखंडी की भूमिका में कैसे आ जाते हैं? दरअसल इनके पीछे सरकार होती है और सरकार का गाइडलाइन होता है। इस पुलिस को अतिक्रमण सिर्फ एक ही क्षेत्र में नजर आता है। जबकि कानून सबके लिए बराबर होता है।

सीपी सिंह ने कहा कि ईद आनेवाला है। आप देखें होंगे कि ईद के चार-पांच दिन पहले ही काली मंदिर रोड के पास मेन रोड ब्लॉक कर दिया जाता है। वहां पुलिस बैरियर लगाती है। वहां लिख दिया जाता है, आपको उधर नहीं जाना है। बीच रोड पर दुकानें सजेंगी। आखिर यहां पुरुषार्थ कहां चला जाता है? और छठ के महीने जब हमारे लोग दुकानें लगायेंगे तो ये चले आयेंगे पुरुषार्थ दिखानें।

सीपी सिंह ने कहा कि उनकी सरकार को चुनौती है, यदि सरकार में पुरुषार्थ है तो मेन रोड को मुक्त करके दिखाइये। मेरा आपका सबका अधिकार है। आने जाने का रास्ता ब्लॉक करके, पुलिस को बैरियर लगाके आप जो रोकते हैं, वो क्यों रोकते हैं? धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। न्याय सबके लिए एक समान होना चाहिए। नहीं तो लीजिये, आज से ही ईद के लिए मेन रोड बंद कर दीजिये और रातू रोड में एक दिन के लिए छठ का बाजार लगाने दीजिये। हरमू रोड व मेन रोड में छठ का बाजार लगाने दीजिये। वे चुनौती देते है कि ऐसा करके पुलिस पुरुषार्थ दिखाये।

सीपी सिंह ने कहा कि पुलिस का पुरुषार्थ तो उन्होंने देखा है कि कर्बला चौक पर सिटी एसपी की गाड़ी जला दी गई और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। मेन रोड में दारोगा की पिटाई हो गई और कोई चूं तक नहीं बोला। कोरोनाकाल में हमारे पड़ोसी डीएसपी की हिन्दपीड़ी में पिटाई हो गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *