नेता प्रतिपक्ष की तरह सदन में गरज रहे सीपी सिंह, कहा- जिसका वजूद होता है, वो बिना पद के भी मजबूत होता है, उधर सदन में मंत्री ने कहा कि मार्च तक का मंईयां सम्मान योजना का पैसा होली के पहले मिल जायेगा
आज जैसे ही झारखण्ड विधानसभा के बजट सत्र का तीसरा दिन नौ मिनट विलम्ब से प्रारंभ हुआ। भाजपा के पांकी विधायक वेल में आ गये, भाजपा विधायकों का हंगामा बढ़ता गया। लेकिन ये हंगामा क्यों कर रहे हैं, किस बात को लेकर कर रहे हैं, पता ही नहीं चला। चार मिनट के बाद जैसे ही हंगामा खत्म हुआ। प्रश्नकाल प्रारंभ हुआ। प्रश्नकाल का पहला प्रश्न भाजपा के सत्येन्द्र नाथ तिवारी का था।
उनका प्रश्न था जब महिला सशक्तिकरण के नाम पर मंईयां सम्मान योजना के तहत सभी महिलाओं को 2500 रुपये दिये जा रहे हैं, तो यहां के रसोइया को प्रतिमाह 2000 रुपये क्यों दिये जा रहे हैं? उनका यह भी कहना था कि सरकार ने उनके द्वारा पूछे गये प्रश्नों के उत्तर में रसोइया को 3000 रुपये देने का प्रावधान किया है। लेकिन ये लागू कब से होगा?
मंईयां सम्मान योजना को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता सीपी सिंह ने भी मामला उठाया। उनका कहना था कि सरकार ने वादा किया कि वो हर महिला को ढाई हजार रुपये देगी, लेकिन यहां तो अब फरवरी बीतने को आया, दिसम्बर के बाद तो न जनवरी और न फरवरी का ही किश्त महिलाओं को दिया गया। आखिर महिलाओं को इन दो माहों का किश्त कब मिलेगा। संबंधित मंत्री ने कहा कि महिला सम्मान योजना की मार्च तक की राशि की तैयारी कर ली गई है और ये सारी राशियां होली के पूर्व राज्य की महिलाओं को उनके खाते में पहुंचा दी जायेगी।
सीपी सिंह के इसी प्रश्न में कई बार नोक-झोक भी देखने को मिले, जब उन्होंने मंत्री इरफान अंसारी द्वारा वरिष्ठ विधायक हेमलाल मुर्मू को यह कहने पर कि वे वरिष्ठ विधायक रहे हैं, तब सीपी सिंह ने कहा कि ये वरिष्ठ विधायक रहे हैं क्या होता है, वे अभी हैं, रहे हैं और रहेंगे। तभी स्पीकर ने कहा कि इरफान जी का ग्रामर थोड़ा कमजोर हैं। सीपी सिंह ने कहा कि मदरसा में पढ़ियेगा तो यही होगा।
इसी क्रम में सदन में किसी माननीय की घंटी बजने लगी। स्पीकर ने कहा कि उक्त मोबाइल को जब्त कीजिये। लेकिन जब्त किसकी होगी, जब्त करनेवाले मार्शल को पता ही नहीं चला। सीपी सिंह के उस सवाल पर की मईंया सम्मान योजना में विधवाओं व दिव्यांग महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं हो, इसके लिए सरकार को उन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। मंत्री ने कहा इसीलिए उनकी सरकार विधवा महिलाओं के पुनर्विवाह को लेकर एक योजना चलाई है।
जिनमें दो लाख रुपये देने का प्रावधान है। केन्द्र में तो इस विभाग से जुड़ी मंत्री भाजपा की अन्नपूर्णा देवी है। क्यों नही, भाजपा उन पर दबाव बनाती है कि वो भी इस पर दो लाख दें, चार लाख विधवा महिलाओं को मिलेगा तो उनका जीवन और बेहतर हो जायेगा। जिस पर सीपी सिंह ने कहा कि मंईयां सम्मान योजना लागू करने के पहले क्या केन्द्र से इस पर बात की थी क्या? ये तो वहीं हुआ कि न राधा को नौ मन तेल होगा और न राधा नाचेगी।
मंत्री चमरा लिंडा के टोपी पर टिप्पणी करते हुए सीपी सिंह ने कहा कि उन्होंने ऐसा टोपी पहन रखा है कि उन्हें पता ही नहीं चल रहा है कि कौन मंत्री जवाब दे रहे हैं। इस पर फिर सदन में हो-हंगामा मचा। सीपी सिंह ने कहा कि वे किसी पर टीका-टिप्पणी नहीं कर रहे, सही में उन्हें पता नहीं चल रहा। इस पर स्पीकर रवीन्द्र नाथ महतो ने कुछ सीपी सिंह पर टिप्पणी की। जिस पर सीपी सिंह ने शायराना अंदाज में जवाब देकर स्पीकर सहित सदन में बैठे सभी माननीयों को चुप करा दिया। वो शेर था -जिसका वजूद होता है, वो बिना पद के भी मजबूत होता है।
इसी बीच प्रश्नकाल में इचाक में हुई सांप्रदायिक घटना का मुद्दा अमित यादव ने उठाया। हेमलाल मुर्मू ने किसानों द्वारा धान की बिक्री में हो रही असुविधा का मुद्दा सदन में उठाया। उनका कहना था कि किसानों की असुविधा को खत्म करने के लिए चाहिए कि उनके बीच जागरुकता फैलायी जाये। इसके लिए स्थानीय जनता और प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित किया जाना चाहिए।