अपनी बात

दैनिक भास्करवालों अपने पाठकों को ये तो बताओ कि जब अमन साहू कल रांची ले आया गया था तो फिर उसका पलामू में कल ही एनकाउंटर कैसे हो गया? और अगर नहीं बता सकते बेशर्मों, तो अपने किये कि माफी तो मांगो

दैनिक भास्कर को अपने पाठकों को यह जरुर बताना चाहिए कि जब अमन साहू 11 मार्च को उसके द्वारा प्रकाशित समाचार के अनुसार रायपुर से रांची ले आया गया तो फिर उसकी एनकाउंटर उसी के द्वारा 12 मार्च को प्रकाशित समाचार के अनुसार पलामू में कैसे हो गई? और अगर यह नहीं बता पाता हैं तो कम से कम इस समाचार को प्रकाशित करनेवाले संवाददाता और उसके संपादक को कम से कम चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।

डूब मरना इसलिए भी कि उसने इतनी बड़ी गलती की, झूठी खबरें छापीं और उसके बावजूद उसने आज अपने कुकृत्यों के लिए अपने पाठकों से क्षमा याचना तक नहीं की। हम आपको बता दें कि आम तौर पर देखा गया है कि कोई भी अखबार जो सभ्य हैं, उससे जब गलती होती हैं तो वह अपने गलतियों के लिए क्षमा तो मांगता ही हैं। लेकिन ये तो दैनिक भास्कर हैं, भला ये कैसे अपने पाठकों से क्षमा मांगेगा। क्षमा मांगने का अधिकार तो इसके पाठकों का हैं। ये तो तब तक गलतियां करते रहेगा, जब तक समाज की छीछालेदर होने की पराकाष्ठा न पार कर जाये।

11 मार्च को फ्रंट पेज पर दैनिक भास्कर ने एक सनसनीखेज खबर छापी। खबर दिया – रायपुर से रांची लाया गया अमन साहू, कारोबारी व डीजीएम पर हमले के संबंध में होगी पूछताछ, जबकि सच्चाई यह है कि अमन साहू रांची लाया ही नहीं गया। पुलिसकर्मियों ने उसे रायपुर से रांची लाने के क्रम में पलामू में ही उसका एनकाउंटर कर दिया। जानकार बताते है कि जिस प्रकार से एनटीपीसी के डीजीएम कुमार गौरव की हत्या हुई और उस हत्या से जिस प्रकार से सरकार व झारखण्ड पुलिस की छीछालेदर हुई।

मामला विधानसभा तक गूंजा, अमन साहू का एनकाउंटर होना ही था, क्योंकि कोई पुलिस या सरकार लगातार हो रहे हत्याओं व कानून व्यवस्था को इन अपराधियों द्वारा दी जा रही चुनौती को लेकर चुप बैठी नहीं रह सकती थी। अमन साहू का एनकाउंटर निश्चय ही उन अपराधियों के मन में भय पैदा कर दिया होगा कि झारखण्ड पुलिस अब अमन साहू के बाद उनका एनकाउंटर करने का मन न बना लें। कहा भी जाता है कि शासन भय से चलता है और अपराधियों के मन में यह भय तो होना ही चाहिए।

लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या दैनिक भास्कर जैसे अखबारों, जिसे कुछ लोग लवण भास्कर भी कहते हैं, उसे क्या ये हक है कि जनता को झूठी खबरें परोसे और झूठी खबरे परोसने के बाद उसके द्वारा हुए इस अपराध की वो क्षमा तक नहीं मांगे। दैनिक भास्कर के लोगों शर्म करो, शर्म करो, शर्म करो, पर करोगे कैसे तुमलोगों ने तो शर्म पहले ही बेच खाया है।

हमारे विचार से तो झारखण्ड पुलिस के वरीय पदाधिकारियों को भी दैनिक भास्कर से यह जरुर पूछना चाहिए कि आखिर दैनिक भास्कर को ये खबर कब और कैसे हाथ लगी कि अमन साहू रायपुर से रांची ले आया गया। उन्हें इसलिए भी पूछना चाहिए कि दैनिक भास्कर ने अपने द्वारा प्रकाशित इस झूठी समाचार के लिए क्षमा याचना तक नहीं की हैं, मतलब उसे विश्वास है कि अमन साहू को रांची ले आया गया था।

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