अपनी बात

बहू (पूर्णिमा साहू) को सदन में याद आये सिर्फ ससुर (रघुवर दास), हेमन्त सरकार को घेरने के चक्कर में अपने ससुर (रघुवर दास) की सदन में जमकर की प्रशंसा, बहू (पूर्णिमा) के इस रूप को देख भाजपा विधायक हैरान

आज सदन में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा पेश किये बजट को लेकर हो रही चर्चा में जमशेदपुर पूर्व की विधायक पूर्णिमा साहू ने भाग लिया। इस चर्चा में वो एक आदर्श बहू की रूप में नजर आई। जैसा उनका सदन में लूक था, ठीक वैसा ही वो सदन में पेश भी आ रही थी।

हालांकि उनके सदन में दिये जा रहे बयान से सत्तापक्ष के कई विधायक व मंत्री तिलमिलाये और सूचना के तहत अपनी बातें भी रखीं। लेकिन पूर्णिमा साहू पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। वो अपने ससुर यानी रघुवर दास के मुख्यमंत्रित्व काल में किये गये कल्याणकारी योजनाओं पर खूब बोली। इधर विपक्ष के कई विधायक जब सत्तापक्ष के मंत्री और विधायकों को तिलमिलाते हुए देखे, तो हंगामा खड़ा करना शुरु किया।

लेकिन ये हंगामा केवल सत्तापक्ष के विधायकों व मंत्रियों को शांत कराने के लिए था। आश्चर्य यह भी था कि जब पूर्णिमा साहू अपने ससुर रघुवर दास के व्यक्तित्व व कृतित्व की चर्चा कर रही थी, तो उस वक्त राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी भी सदन में मौजूद थे। जिनके शासनकाल में उनके ससुर यानी रघुवर दास राज्य के प्रथम श्रम मंत्री भी बने थे।

लेकिन अपने भाषण में एक बार भी उन्होंने बाबूलाल मरांडी का नाम तक नहीं लिया और न ही उनके शासन काल में किये गये विकासात्मक कार्यों की चर्चा की। आश्चर्य यह भी हैं कि भाजपा शासनकाल में कभी अर्जुन मुंडा भी मुख्यमंत्री रहे हैं। लेकिन उनके कार्यकाल में किये गये कल्याणकारी कार्यों का भी पूर्णिमा ने नाम लेना उचित नहीं समझा।

उनके भाषण में केवल और केवल उनके ससुर रघुवर दास ही थे। वो कह रही थी कि उनके ससुर के द्वारा बनाये गये विधानसभा में ही आज की सरकार काम कर रही हैं। वो कह रही थी कि उनके ससुर के शासनकाल में मुख्यमंत्री जनसंवाद कार्यक्रम के तहत कई समस्याओं का हल हो गया।

लेकिन शायद वो भूल गई, लगता है कि किसी ने बताया नहीं कि उसी मुख्यमंत्री जनसंवाद कार्यक्रम में कार्यरत कुछ महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय महिला आयोग व राज्य महिला आयोग को उस दौरान पत्र भी लिखा था कि उनके साथ कैसी गंदी हरकत की जा रही हैं। आश्चर्य कि उनके ससुर रघुवर दास के समय के उनके प्रधान सचिव संजय कुमार ने एक जांच कमेटी भी बनाई थी। जांच कमेटी ने रिपोर्ट भी सम्मिट की थी। लेकिन हुआ क्या?

उनके ससुर के चहेते मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र के संचालकों को साफ बचा लिया गया। इसी मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र की घटियास्तर के हरकतों को 2020-21 के बजट सत्र में तत्कालीन जमशेदपुर पूर्व के विधायक सरयू राय ने भी सदन में उठाया था। ये एक सबूत चलेगा कि और भी सबूत दिया जाये कि उनके ससुर रघुवर दास कैसे व्यक्तित्व के धनी थे?

एक बेटी की मौत से तबाह एक पिता के साथ उनका व्यवहार तो भाजपा के नेता ही जानते हैं। जब वर्तमान राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश उक्त पिता को उनसे मिलाने के लिए धुर्वा के एक मंच पर ले गये थे। जरा दीपक प्रकाश से मिलकर पूर्णिमा साहू को पूछ लेना चाहिए या इस मामले को स्वयं यू-ट्यूब पर देख लना चाहिए।

आश्चर्य की बात है कि सदन में उनका भाषण केवल उनके ससुर रघुवर दास को ही समर्पित था। लेकिन इसी राज्य में वर्तमान में भाजपा के कई ऐसे नेता हैं, जो मुख्यमंत्री पद को सुशोभित कर चुके हैं। जिसमें बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा के नाम अग्रगणी लोगों में लिया जाता है। लेकिन सदन में दिये गये भाषण में पूर्णिमा द्वारा इन लोगों का नाम नहीं लिया जाना, साफ बताता है कि भाजपा में किस कदर गुटबाजी हावी है और रघुवर दास की नजरों में बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा की क्या औकात है?

आश्चर्य की बात है कि आज भी रघुवर दास को किस व्यक्ति या किस पदधारी से कैसे बात की जाती हैं, उन्हें इसका इल्म ही नहीं हैं, जिसके कारण इन्हें वो इज्जत नहीं मिलती, जिसके वो हकदार है। पूर्णिमा साहू ने बेशक अपने ससुर रघुवर दास का सदन में जमकर गुणगान किया, लेकिन वो भाजपा के अन्य नेताओं द्वारा किये गये विकासात्मक कार्यों का भी अपने भाषण में गुणगान करती तो वो निश्चय ही उनके भाषण में चार चांद लगाता।

लेकिन, कहा जाता है कि कभी-कभी अच्छा भोजन भी जब ठीक से नहीं परोसा जाता, तो जिसे वो भोजन परोसा जाता है, उसे अच्छा नहीं लगता और वो व्यक्ति उस भोजन को छोड़कर चला जाता हैं। पूर्णिमा साहू का आज का सदन में दिया गया भाषण, उसी श्रेणी में आता है। अंत में पूर्णिमा साहू को अपने ससुर रघुवर दास से यह भी पूछना चाहिए कि जब वे ओडिशा के राज्यपाल थे तो उनके बेटे ने एक अधिकारी के साथ कैसा सलूक किया था और उस प्रकरण पर उनका क्या रौल था? आखिर उन्हें राज्यपाल पद से हाथ धोना क्यों पड़ा?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *