अपनी बात

सदन में मोबाइल निषेध होने के बावजूद, मोबाइल से ही सूचना पढ़ दी रागिनी सिंह, दुखी स्पीकर रवीन्द्रनाथ महतो ने कहा अगर कोई सदन की गरिमा को प्रभावित कर हास्यास्पद बनाना चाहेगा तो वे कर ही क्या सकते हैं?

आज झारखण्ड विधानसभा में उस समय हास्यास्पद स्थिति हो गई। जब झरिया की विधायक रागिनी सिंह ने सूचना, मोबाइल में देखकर पढ़ने लगी। जैसे ही रागिनी सिंह को मोबाइल से सूचना को पढ़ता हुआ स्पीकर रवीन्द्र नाथ महतो ने देखा। तो वे इतने दुखी हुए कि उसकी विवेचना नहीं की जा सकती। उन्होंने सदन में साफ कह दिया कि ऐसे तो सदन में मोबाइल लाना ही निषेध है। लेकिन अगर आप माननीय सदन की गरिमा को प्रभावित करेंगे, हास्यास्पद बनाना चाहेंगे। तो उसमें वे क्या कर सकते हैं?

जरा देखिये स्पीकर रवीन्द्र नाथ महतो ने सदन में क्या कहा –

“माननीय सदस्य, सारे लोग हैं, सुनिये-सुनिये, मेरा भी पीड़ा सुनिये। अब आप माननीया सदस्या को भेज रहे हैं मोबाइल में इनफारमेशन कि आप सदन के अंदर सूचना दीजिये। अब मोबाइल देखकर वो सूचना को पढ़ रही है। अब आप बताइये। अब आप सबलोग का सहमति होगा तो हम मानने को तैयार है। ऐसा नहीं होता, ऐसा नहीं होता, एक तो सदन में मोबाइल लेकर आना ही निषेध है। उ बात नहीं कर रहे। किसी को सूचना देना है तो पूर्व में जानकारी ले लें। अब बाहर में किसी ने कह दिया कि तुम सदन में सूचना उठा दो। अब सब माननीय सदन में सूचना मोबाइल से उठाने लगे। तो हम समझते है कि सदन की गरिमा आप सब माननीयों के उपर ही निर्भर है। आसन उसमें कुछ नहीं कर सकता। अगर आप अपने सदन की गरिमा को बनाये रखियेगा, तो ठीक-ठाक है। अगर आप सदन को हास्यास्पद बनाना चाहियेगा तो आसन उसमें कुछ नहीं कर सकता। अब सदस्य नया है। बाहर से दबाव आया होगा। तो उन्हें इसे लिखकर लाना था कि इसे सूचना में उठाना है।”

विद्रोही24 ने साफ देखा है कि विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान महत्वपूर्ण प्रश्नों पर जब सवाल-जवाब हो रहे होते हैं तो कई माननीय मोबाइल से बात कर रहे होते हैं तो कोई मोबाइल में बहुत देर तक उलझा रहता है। सच्चाई यह हैं कि इन माननीयों से इसी दौरान पूछ लीजिये कि वर्तमान में सवाल कर रहे माननीय ने क्या पूछा और मंत्री ने क्या जवाब दिया। वे जवाब नहीं दे सकेंगे। आज तो रागिनी सिंह द्वारा मोबाइल से सूचना देने पर विधानसभा की गरिमा तो प्रभावित हो ही गई।

यही हाल प्रेस दीर्घा का है। जहां विधानसभाध्यक्ष द्वारा प्रेस दीर्घा के बाहर और अंदर दोनों जगह बोर्ड लगवाये गये हैं। जिसमें साफ लिखा है कि इस दीर्घा में निषिद्ध वस्तुओं के साथ मोबाइल सहित प्रवेश वर्जित है एवं दीर्घा में बैठने के दौरान सदन की गरिमा के अनुसार व्यवहार अपेक्षित हैं। लेकिन इस दीर्घा में भी आप देखेंगे कि कई पत्रकारों की मोबाइल की घंटिया बजती रहती हैं। प्रेस दीर्घा में बैठकर लोग जोर-जोर से अपने परिचितों के साथ मोबाइल पर बातें भी करते रहते हैं।

कुछ तो ऐसी-ऐसी हरकतें करते हैं कि सिर शर्म से झूक जाता है। मतलब प्रेस दीर्घा में …  भी देते हैं। आज ही विद्रोही24 ने सफाईकर्मियों से उस …. को साफ भी कराया। मतलब हद हो रही हैं। कई पत्रकारों को तो प्रेस दीर्घा से ही चलते सदन का वीडियो बनाते देखा गया है। पर कोई बोलता ही नहीं। स्पीकर ने ठीक ही कहा है कि विधानसभा की गरिमा को बनाकर रखना तो सबकी जिम्मेदारी है। लेकिन लोग इस जिम्मेदारी को समझे तब न। स्पीकर ने तो अपना दर्द बयां कर दिया, अब माननीय और प्रेस दीर्घा में बैठनेवाले स्वयं को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलवाने में गर्व महसूस करनेवाले इसे अपने जेहन में उतारेंगे तब न।

स्पीकर ने तो इसी के लिए माननीयों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर भी पिछले दिनों लगवाया था। पर आये कितने। दरअसल, लोग भूलते जा रहे है कि हर चीज बताने की चीज भी नहीं होती, कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जो संस्कार में होते हैं, वो समय-समय पर झलकते भी हैं। लेकिन अगर कोई संस्कार को ताक पर रखकर विधानसभा आ जाये तो फिर इसे क्या कहा जाये।

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