सदन में अपने क्रियाकलापों और अपनी बातों को रखने के अंदाज के कारण छा गये पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव
झारखण्ड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज रामेश्वर उरांव छा गये। अपने क्रियाकलापों और अपनी बातों को रखने के विशेष अंदाज ने उन्हें सभी से अलग कर दिया। दरअसल ध्यानाकर्षण का समय था। रामेश्वर उरांव को ध्यानाकर्षण के दौरान सरकार से सवाल पूछने थे और उसका जवाब सुनना था।
लेकिन वे आज सरकार से कुछ भी सवाल पूछने को तैयार नहीं थे। वे बार-बार सरकार को सुझाव दे रहे थे। कई बार स्पीकर ने उन्हें ध्यानाकर्षण की याद दिलाई, सरकार से सवाल पूछने को कहा। लेकिन वे आज सवाल पूछने के मूड में नहीं थे। उनका कहना था कि अगर सरकार उनके सूझावों को मान लें, तो उनके लिये यही बहुत बड़ी बात होगी।
रामेश्वर उरांव का सुझाव जल संसाधन विभाग को लेकर था। सचमुच अगर सरकार उनके सुझावों को मान लेती हैं तो ये राज्य के हित में ही होगा। जब स्पीकर ने उन्हें मंत्री से सवाल पूछने को कहा तो उन्होंने बड़े ही सुंदर भाव से कहा कि अरे मंत्री मेरा भतीजा हैं, उससे क्या सवाल पूछे, बस सुझाव दे रहा हूं, वो मान लें। बात चाचा-भतीजे की है।
रामेश्वर उरांव ने कहा कि सरकार कह रही है कि जल संसाधन आयोग बनाने की प्रक्रिया उन्होंने शुरु कर दी हैं। अगर यह सही हैं तो आज वे पूरे मन से सरकार को आधा धन्यवाद दे रहे हैं और जब ये स्वरूप में आ जायेगा तो पूरे मन से पूरा धन्यवाद देंगे। उन्होंने कहा कि 2011 में जल नीति बनी थी, इस पर कोई काम नहीं हो सकता। इस पर काम होना चाहिए। 1978 में स्वर्णरेखा परियोजना बनी, वो आज भी अधूरी है। इसलिए अच्छा रहेगा कि बड़ी परियोजनाओं की जगह छोटी-छोटी योजनाएं लीजिये। नहर में गाद भरा है, उसकी सफाई करिये।
उन्होंने इसी क्रम में फिर कहा कि उन्होंने पहले ही तय कर लिया था कि प्रश्न नहीं पुछूंगा, जो बोल रहा हूं, उसे सरकार ग्रहण कर लें। जैसे – सीमांत किसानों के लिए कुएं की व्यवस्था कीजिये। इस राज्य के लिए जल अति महत्वपूर्ण विषय होना चाहिए। लेकिन जल के लिए बजट ही कम हैं। होना तो ये चाहिए कि जल के लिए बजट अधिक होना चाहिए। संबंधित विभागीय मंत्री हफीजुल अंसारी ने उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुना और साफ कहा कि वे उनका सभी विषयों पर मार्गदर्शन लेंगे और जलनीति पर काम होगा।