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स्टेटस सिंबल बने झारखण्ड विधानसभा पत्रकार दीर्घा समिति की अधिसूचना जारी, मचा बवाल, पूर्व के कई सदस्यों को बाहर का रास्ता दिखाया गया, कई नये हुए शामिल, कई ऐसे भी शामिल जो दीर्घा समिति के योग्य ही नहीं

झारखण्ड विधानसभा पत्रकार दीर्घा समिति के नये सदस्यों की अधिसूचना जारी हो गई है। यह अधिसूचना झारखण्ड विधानसभाध्यक्ष के आदेश से प्रभारी सचिव माणिक लाल हेम्ब्रम ने जारी किया है। जिसकी जानकारी नये-नये पत्रकार दीर्घा समिति के सदस्यों को झारखण्ड विधानसभा के जनसम्पर्क अधिकारी सह सदस्य सचिव गुलाम मोहम्मद सरफराज द्वारा दे दी गई है।

जैसे ही यह अधिसूचना जारी हुई। इस समिति में रहे पूर्व सदस्यों के चेहरे मुरझा गये हैं, जबकि जिन्हें इस बार के दीर्घा समिति में फिर से जगह मिले हैं, उनके चेहरे खिल उठे हैं। चेहरे उनके भी खिले हैं, जिन्हें पहली बार पत्रकार दीर्घा समिति में स्थान मिला है। ऐसे सभी लोग इस अधिसूचना को अपने परिवारों और रिश्तेदारों को दिखा रहे हैं, कि वे झारखण्ड विधानसभा पत्रकार दीर्घा समिति के सदस्य बनाये गये हैं।

आश्चर्य यह भी हैं कि उनके परिवार और रिश्तेदारों का समूह भी उन्हें बधाई देते अघा नहीं रहे हैं। दरअसल ऐसा यह इसलिये दिख रहा है कि अब पत्रकार दीर्घा समिति का सदस्य बनना भी स्टेटस सिंबल हो गया है। हालांकि इसका कोई फायदा नहीं होता। लेकिन झारखण्ड में जब से स्टडी टूर के नाम पर पत्रकार दीर्घा समिति के सदस्यों का समूह भारत भ्रमण के लिए विधानसभा की ओर से भेजा जाने लगा, तब से इस समिति में स्वयं को जोड़ने के लिए कई पत्रकारों का समूह हाथ-पांव मारने लगे। जिसमें इंफ्लूएंसर्स भी शामिल हैं।

यही नहीं कभी-कभी विशेष आयोजनों पर मिलनेवाले खेल-किट (जिसमें टी-शर्ट, पैंट, जूते-मोजे, बैग आदि होते हैं) भी इस समिति में स्वयं को सम्मिलित करने के लिए इन कथित पत्रकारों को प्रेरित किये हैं। विद्रोही24 ने जब रांची स्थित कई संविधान विशेषज्ञों से पत्रकार दीर्घा संबंधित बातचीत की, तो उनका कहना था कि पत्रकार दीर्घा समिति इसलिए बनाई जाती है कि राज्य की जनता को विधानसभा में घटित होनेवाली सही-सही जानकारी इनके माध्यम से उन्हें प्राप्त हो जाये।

लेकिन अब इतना देश व समाज में चारित्रिक पतन हुआ है कि अब किसी से भी सत्य बातों की आशा रखना ही बेमानी है। पहले प्रमुख-प्रमुख अखबारों-चैनलों के पत्रकार प्रतिनिधि इसमें शामिल होते थे, उसमें भी वे ही लोग शामिल होते थे, जो सदन की पत्रकारिता का विशेष अनुभव रखते थे।

अब तो सही मायनों में सदन की पत्रकारिता के अनुभवों की इन सबसे परीक्षा ले ली जाये, तो ये दिन में तारे गिनते नजर आयेंगे। यही कारण है कि इन सभी का दीर्घा समिति में रहने के बावजूद भी वो सम्मान नहीं होता, जैसा 10-15 वर्ष पूर्व दीर्घा समिति में रहनेवाले सदस्यों का हुआ करता था।

हाल तक झारखण्ड विधानसभा की पत्रकार दीर्घा समिति में पूर्व में 33 सदस्य थे। जिसमें ऐसे-ऐसे लोग शामिल थे। जिन्हें विधानसभा संचालन के नियमों का पता तक नहीं व विधानसभा के समाचारों को कैसे अखबारों, चैनलों व अपने सोशल साइटों में स्थान दिया जाता है, इसका भी ज्ञान नहीं, पत्रकार दीर्घा का सम्मान तो इन्होंने कभी किया ही नहीं।

लेकिन देखा जाता था कि विधानसभा पत्रकार दीर्घा का परिचय पत्र अपने गर्दन में लटका कर ये इस प्रकार अकड़कर चलते थे। जैसे कोई नई-नई विवाहित महिला अपने मंगलसूत्र को लटका कर चला करती हैं। घमंड इतना कि पूछिये मत। इसी परिचय पत्र के आधार पर ये अपने से बड़े व जानकार पत्रकारों के सम्मान के साथ खेलना शान भी समझा करते थे।

अब खुशी इस बात की कि इस बार जो नई पत्रकार दीर्घा समिति बनी हैं। उसमें से ऐसे लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। लेकिन सच्चाई यह भी है कि इस बार भी ऐसे लोगों को फिर से पत्रकार दीर्घा समिति में शामिल किया गया। जो इस दीर्घा समिति के लायक ही नहीं।

पहला – राज्य सरकार जिस अखबार को स्वीकृत सूची में शामिल नहीं की है। उस अखबार से जुड़े व्यक्ति को इस बार पत्रकार दीर्घा समिति का सदस्य बना दिया गया है। जो घोर आश्चर्य है। मतलब जो स्वीकृत सूची में ही नहीं, उस अखबार से जुड़े व्यक्ति को किस आधार पर विधानसभा के दीर्घा समिति का सदस्य बना दिया गया?

दूसरा – इसी दीर्घा समिति में ऐसे पत्रकार का फिर से नाम आया है। जिसने अपने सोशल साइट पर जमकर विधानसभा में घटित एक घटना की जमकर धज्जियां उड़ाई। आज भी उसकी इस हरकत उसके सोशल साइट पर मौजूद है। विधानसभाध्यक्ष ने सदन में खुलकर कहा कि उक्त अश्लील शब्द को स्पंज कर दिया गया।

उसके बाद भी वह अपने सोशल साइट पर लिखा। खूब लिखा और अपने को महिमामंडित करवाया। अब सवाल विधानसभा सचिवालय से ही कि क्या ऐसा व्यक्ति दीर्घा समिति का सदस्य हो सकता है, जो विधानसभाध्यक्ष द्वारा स्पंज किये गये शब्दों को अपने यहां बार-बार स्थान दें।

तीसरा – पहले की तरह इस बार भी तपन महतो को प्रभात खबर देवघर का बताकर दीर्घा समिति में शामिल किया गया है। जबकि तपन महतो प्रभात खबर देवघर के नहीं, बल्कि नाला के प्रभात खबर के स्टिंगर हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि तपन महतो, स्पीकर रवीन्द्र नाथ महतो के रिश्तेदार भी हैं, जिनके कारण उन्हें पत्रकार दीर्घा समिति का सदस्य बनाया गया है।

होना तो यह चाहिये था कि प्रभात खबर का प्रधान संपादक ही अपने नाला स्टिंगर तपन महतो से यह पूछता कि आप कब से विधानसभा की पत्रकार दीर्घा समिति के सदस्य के योग्य हो गये? एक ही संस्थान से दो-दो लोग सदस्य कैसे हो गये? लेकिन यह पूछने के लिए भी सत्यनिष्ठता का कलेजा होना चाहिए।

ऐसे तो जो नये-नये पत्रकार दीर्घा समिति के सदस्य बने हैं। उनमें से कई सदस्यों के बारे में विद्रोही24 आराम से लिख सकता है। वो भी प्रमाण के साथ। लेकिन ये तीन प्रमाण बताने के लिए काफी है कि झारखण्ड विधानसभा पत्रकार दीर्घा समिति की क्या स्थिति हैं? इससे क्या उम्मीद लगाई जा सकती हैं? ये कितना झारखण्ड विधानसभा का सम्मान करेंगे?

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