सदन में कल्पना सोरेन का बयानः जिन अधिकारों से महिलाओं को वंचित रखा गया था, उस अधिकार को पहली बार हेमन्त सरकार के शासनकाल में उन्हें ससम्मान प्रदान किया जा रहा है
आज सदन में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा पेश किये बजट को लेकर हो रही चर्चा में भाग लेते हुए गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन ने खुले स्वर में कहा कि राज्य की सत्तापक्ष अपने झारखण्ड को एक न एक दिन सोना अबुआ झारखण्ड बनाकर रहेगी, ये सपना एक दिन अवश्य साकार होगा।
कल्पना सोरेन ने सदन में साफ कहा कि राज्य में पिछड़ेपन में महिलाओं की स्थिति, अन्य लोगों की अपेक्षा और भी भयावह है। वो अपने जीवन को जीने के लिए विवश है, आखिर क्यों? भ्रूण हत्या क्यों हो रही है? नीति निर्माताओं को यह बात स्वीकारना होगा। उन्होंने कहा कि जातिगत पिछड़ेपन को सामान्य पिछड़ेपन से जोड़ेंगे तो गलत होगा। लेकिन इस स्थिति को सुधारने का काम हेमन्त सरकार कर रही है।
कल्पना सोरेन ने कहा कि केन्द्र कहता है कि सदन में महिलाओं को आरक्षण देंगे, लेकिन कब देंगे? हमारे विचार से तो महिलाओ को सुरक्षित वातावरण गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा व रोजगार दे दें तो बाकी काम महिलाएं खुद ही कर लेंगी। कल्पना ने कहा कि पहली बार उनकी सरकार ने राज्य में आधी आबादी के लिए एक क्रांतिकारी योजना लाई। जिसका नाम था – मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना। इस योजना नें लाखों महिलाओं की आखों में खुशियां दे गई। हमारे मुख्यमंत्री की सोच आधी आबादी को समर्पित हैं, ये योजनाएं उसका उदाहरण है।
कल्पना ने कहा कि इस योजना को दबाने के लिए पीआईएल गैंग सक्रिय थे। लेकिन आज खुशी हैं कि यह योजना का लाभ महिलाओं को मिल रहा हैं। गाजे-बाजे के साथ इस योजना की राशि सीधे महिलाओं की एकाउंट में जा रही हैं। छात्रावासों का निर्माण हो रहा है। महिलाओं को वनाधिकार के पट्टे मिल रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में भी उनके विकास के लिए कई योजनाएं संचालित हैं।
मतलब साफ है कि राज्य की हेमन्त सरकार ने महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें मजबूती दी है। इससे ये महिलाएं अपना तथा बच्चों का सेहत, शिक्षा व स्वरोजगार के अवसर तलाश रही हैं। हालांकि ये मुश्किल था, लेकिन हेमन्त सोरेन के डेडिकेशन ने असंभव को संभव कर दिया।
कल्पना सोरेन ने कहा कि हमारी सरकार ने पेंशन योजना से 21 लाख लोंगों को जोड़ा, आज 32 लाख लोगों को पेंशन दी जा रही हैं। विपक्ष ने तो इन 21 लाख लोगों को धूप में खड़ा कर दिया था। इनकी सरकार दिव्यांगों को 300 देती थी, हमारी सरकार ने इन्हें एक हजार रुपये प्रदान किये। सावित्री बाई फूले योजना के तहत पढ़नेवाली लड़कियों को उनके एकाउंट में 40 हजार रुपये की राशि दी जा रही है। यानी वो अधिकार जिससे हमें वंचित रखा गया गया था। उस अधिकार को अब हेमन्त सरकार ने देना शुरु किया है।