अपनी बात

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार से पूछा, PWD सचिव सुनील कुमार जब हजारीबाग के DC थे, तब NTPC के अफसरों की पिटाई मामले में NHRC ने उन पर 25000 का आर्थिक दंड लगाया था, उन्होंने उसे जमा किया या नहीं?

झारखण्ड विधानसभा में राज्य सरकार द्वारा पेश किये गये पथ निर्माण विभाग, खान एवं भूतत्व विभाग, परिवहन विभाग एवं राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के वार्षिक प्रतिवेदन व वार्षिक कार्य योजना पर हुए चर्चा के दौरान पथ निर्माण विभाग के सचिव सुनील कुमार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप के बाद सत्तापक्ष द्वारा किये जा रहे हंगामे पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार व सत्तापक्ष से ही पूछ डाला।

सरकार व सत्तापक्ष बताए कि जब वे लोग पथ निर्माण विभाग के सचिव सुनील कुमार को बचाने के लिये इतना ही शोर मचा रहे हैं तो लगे हाथों यह बता दें कि आज जिस अधिकारी को बचाने में जो इतना विचार दे रहे हैं तो पीडब्लड्यूडी के सचिव सुनील कुमार जब हजारीबाग के डीसी थे तो एनटीपीसी के अफसरों के साथ उनके द्वारा की गई मारपीट के बाद एनएचआरसी ने उन पर 25 हजार रुपये का आर्थिक दंड क्यों लगाया था और जब एनएचआरसी ने आर्थिक दंड लगा दिया तो लगे हाथों ये भी बताइये कि उन्होंने आर्थिक दंड यानी 25 हजार रुपये जमा किया या नहीं?

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जैसे ही ये बातें कही। सदन में शोर कर रहे सत्तापक्ष जिसमें मूलतः कांग्रेस के कोटे से बने मंत्रियों का समूह और कांग्रेसी विधायक शामिल थे। सबकी घिग्घी बंद हो गई। उसके बाद किसी के मुंह से एक सुर तक नहीं निकला। जबकि नेता प्रतिपक्ष के यह पूछने के पूर्व कोई वेल में जा रहा था तो कोई अपने ही सीट पर से शोर मचा रहा था, कांग्रेस कोटे के मंत्री तो अपने ही सीट पर खड़े होकर इस कदर चिल्ला रहे थे, जैसे वे सदन में मंत्री पद पर नहीं, सामान्य विधायक हो और नये-नये सदन में आये हो।

हंगामे के कारण सत्येन्द्र नाथ तिवारी को अपनी पूरी बात रखने का नहीं मिला मौका, गुस्से में वेल में पहुंचे

वेल में जानेवाले कांग्रेसी विधायक अनूप सिंह थे, जबकि सीट पर चिल्ला रही मंत्री दीपिका पांडेय सिंह थी और संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर तथा कांग्रेसी विधायक राजेश कच्छप थे। दरअसल जब विभागीय प्रतिवेदन और वार्षिक कार्य योजना पर चर्चा चल रही थी, तो भाजपा के विधायक सत्येन्द्र नाथ तिवारी ने सुनील कुमार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की, जिससे कांग्रेसी विधायक और कांग्रेसी कोटे से बने मंत्री तिलमिला उठे।

स्थिति ऐसी हो गई कि सत्येन्द्र नाथ तिवारी को जितना समय मिलना था बोलने के लिए, उतना समय तक नहीं मिला। जिससे क्रोधित होकर सत्येन्द्र नाथ तिवारी वेल में पहुंच गये और अपनी नाराजगी विधानसभाध्यक्ष रवीन्द्रनाथ महतो के पास प्रकट करने लगे। रवीन्द्रनाथ महतो ने कहा कि चूंकि अब वे दूसरे माननीय का नाम पुकार चुके हैं। इसलिए वे अपनी बातें लिखित रूप में दे दें। इसी बीच इसी चर्चा के दौरान भाकपा माले के विधायक अरुप चटर्जी और झारखण्ड क्रांतिकारी लोकतांत्रिक मोर्चा के विधायक जयराम महतो ने सरकार से विस्थापन आयोग बनाने की मांग की।

सरयू राय ने कहा वित्त मंत्री ने अपने बजट में खान विभाग का उल्लेख तक नहीं किया

जदयू विधायक सरयू राय ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि सरकार को तो यहां तक पता नहीं है कि जो पैसा आ रहा हैं, वो कहां खर्च हो रहा है। वित्त मंत्री द्वारा तीन मार्च को पेश किये गये बजट में खान विभाग का उल्लेख तक नहीं हैं। इसी से पता चल जाता है कि सरकार की प्राथमिकता में खान विभाग हैं ही नहीं। सरयू राय ने कहा कि खान में बालू का नाम तक नहीं। 

बालू का राजस्व सरकार को मिलता तक नहीं। जेएसएमडीसी 100 प्रतिशत बालू का पैसा अपने पास रख लेता हैं, जबकि उसे 85 प्रतिशत पैसा सरकार को देना हैं और 15 प्रतिशत ही अपने पास रखना है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य तो यह भी है कि सरकार ने आज तक खनिज नीति ही नहीं बनाई और जब नीति ही नहीं बनाई तो फिर खनिज से संबंधित बातों की बात करना ही बेमानी है।

चर्चा में झामुमो से हेमलाल मुर्मू, कांग्रेस से प्रदीप यादव व राजेश कच्छप आदि ने भी भाग लिया। सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि चर्चा के दौरान जो भी सुझाव उन्हें मिले हैं। वे राज्यहित में उन सुझावों को शामिल करने की कोशिश करेंगे, क्योंकि कई लोगों ने बेहतर सुझाव दिये हैं। इसके तुरन्त बाद स्पीकर रवीन्द्र नाथ महतो ने सदन आगामी 18 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी।

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