नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का बयान, हेमन्त सरकार में हिन्दूओं द्वारा होली मनाना अपराध, हिन्दू अपना त्यौहार मनायेंगे तो उन पर बोतल बम और पत्थर से होगा हमला और हिन्दूओं के ही खिलाफ FIR भी दर्ज होगा
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल साइट फेसबुक के माध्यम से अपनी बातें रखते हुए कहा है कि उन्होंने कल आशंका व्यक्त की थी कि होली के दिन गिरिडीह के घोड़थंबा में हुई हिंसा मामले में प्रशासन उपद्रवियों का बचाव करते हुए मामले को संतुलित दिखाने के लिए पीड़ित हिंदू पक्ष पर कारवाई कर सकती है।
अब इस मामले में दर्ज FIR को देखने से ऐसा लगता है जैसे यह कोई शिकायतवाद नहीं, बल्कि हिंदुओं पर हुए हमले का एक पूर्व नियोजित खाका हो। FIR में जिस प्रकार से घटना को वर्णित किया गया है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस-झामुमो के शासन में हिंदुओं ने होली मनाकर कोई अपराध कर दिया है। यदि हिंदू अपना त्योहार मनायेंगे तो उन पर बोतल बम और पत्थर से हमला होगा, फिर उसके बाद घटना का दोषी बताते हुए उन पर ही मुकदमा भी दर्ज होगा।
यह FIR पूरी तरह तुष्टिकरण से प्रभावित लगती है, जिसमें हेमंत सरकार की हिंदूविरोधी मानसिकता स्पष्ट नज़र आती है। सिर्फ पीड़ित हिंदू पक्ष को कटघरे में खड़ा कर उन्हें ही दोषी ठहराया जाने की सुनियोजित साजिश रची गई है। घटना के असली गुनहगारों को बचाने की पटकथा (FIR) लिखकर सरकार ने उपद्रवियों का मनोबल बढ़ाने और भविष्य में हिंदुओं के ऊपर ऐसे ही हिंसक हमले करने के लिए प्रेरित किया है।
बाबूलाल मरांडी ने आगे लिखा है कि गिरिडीह के घोड़थंबा में इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाने वाले विकास शाह को पुलिस ने जिस क्रूरता के साथ पीटा है, वह चीख चीख कर पुलिस की बर्बरता की गवाही दे रहा है। बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से पूछा है कि, क्या इसी तरह जनता को पुलिसिया जुल्म के हवाले छोड़ दिया जाएगा?

गिरिडीह के घोड़थंबा में इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाने वाले विकास शाह पुलिस द्वारा क्रूरता से की गई पिटाई का चिह्न दिखाते हुए
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पुलिस की यह कारवाई बेहद शर्मनाक और अक्षम्य है। लोकतंत्र में लाठीतंत्र की कोई जगह नहीं है। पुलिस की दमनात्मक कारवाई को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले की जांच कर विकास के साथ अमानवीय व्यवहार करने वाले सभी पुलिसकर्मियों पर सख्त कारवाई हो, अन्यथा पीठ पर दिख रहे एक-एक ज़ख्म का हिसाब लिया जाएगा।