एक बार फिर धनबाद के गांधी सेवा सदन की मर्यादाओं को तार-तार किया धनबाद के पत्रकारों ने, प्रेस क्लब द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह में मादक पदार्थ का सेवन, होली के नाम पर की गई अश्लील हरकतें, प्रशासन मौन
एक बार फिर धनबाद के गांधी सेवा सदन की मर्यादाओं को तार-तार किया है – धनबाद के पत्रकारों ने। धनबाद प्रेस क्लब द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह में जमकर मादक पदार्थों का सेवन किया गया है। होली के नाम पर अश्लील हरकतें तक की गई। वो भी महात्मा गांधी जी के नाम पर बने गांधी सेवा सदन में। आश्चर्य की बात यह है कि इतना सब कुछ हो गया, लेकिन जिन्होंने गांधी जी के परिसर में उनकी मर्यादाओं को तार-तार किया, उनके खिलाफ प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की हैं और इस पर वे मौन हैं।
विद्रोही24 के पास वो सारी वीडियो मौजूद है, जो इनकी गंदी हरकतों को साफ दिखा रहा है। ये गंदी हरकत करनेवालों में धनबाद प्रेस क्लब का एक बड़ा अधिकारी भी मौजूद है। आश्चर्य इस बात की भी है कि इतनी अश्लील हरकतें, वो भी होली के नाम पर, गांधी सेवा सदन में कोई कैसे कर सकता है? आश्चर्य इस बात की भी है कि इस कार्यक्रम में धनबाद के बड़े से लेकर छोटे अखबारों/मीडिया हाउसों के पत्रकार तक मौजूद थे।
लेकिन किसी ने भी इन गंदी हरकतों पर चूं तक नहीं बोला। सभी इस प्रकार की अश्लील हरकतों पर परम आनन्द की डूबकी लगा रहे थे। आप इसी समाचार में यूज किये गये फोटों को ध्यान से देखिये कि गेरुआधारी गमछा लपेटे धनबाद प्रेस क्लब का एक अधिकारी का हाथ, एक पत्रकार के किस अंग को स्पर्श कर रहा हैं और वो कर क्या रहा हैं? ये तो फोटो है। जब आप वीडियो देखेंगे तो शर्म से डूब मरेंगे। लेकिन इनका क्या?
वरिष्ठ पत्रकार सुशील भारती कहते हैं कि ये घोर निंदनीय है। लोग पत्रकारों से अपेक्षा रखते हैं कि वे गांधी और उनके मूल्यों की रक्षा करेंगे। लेकिन जब वे ही गांधी सेवा सदन जैसे परिसर में गलत हरकतें करेंगे। मादक पदार्थों का सेवन करेंगे। अश्लील हरकतें करेंगे, तो फिर लोग किससे अपेक्षा रखेंगे। आश्चर्य की बात है कि ये पत्रकार समाज से सलामी लेते हैं। आदर-सम्मान पाते हैं। इनकी नैतिकता कुछ है कि नहीं, कि इसे भी इन्होंने तिलांजलि दे दी।
ज्ञातव्य है कि 2007 में भी धनबाद के पत्रकारों ने गांधी सेवा सदन में ऐसी ही हरकत की थी। गांधी सेवा सदन परिसर का अपमान किया था। उस वक्त तो धनबाद के पत्रकारों ने यहां मुर्गा तक कटवा दिया था। सिगरेट तक फूंक डाले थे। नशा जो किया सो अलग। इस मुद्दे को उस वक्त मैंने ही प्रमुखता से उठाया था। जो चर्चा का विषय बना था। आज भी लोग उस प्रकरण को भूले नहीं हैं। लेकिन जिस प्रकार से दो दिन पूर्व होली मिलन समारोह के नाम पर इन पत्रकारों ने अपनी अश्लील हरकतों से गांधी सेवा सदन की मर्यादाओं को तार-तार किया, उक्त 2007 की घटना को इन सब ने ताजा कर दिया।
धनबाद में अब 75% गैर पत्रकार है जो पत्रकार का लबादा ओढ़े हुए हैं ।।अधिकारियों को इसपर ध्यान देना होगा कि गांधी की मर्यादा बची रहे।