भयंकर बीमारी से ग्रस्त आरटीआई एक्टिविस्ट महेश कुमार को बीसीसीएल अधिकारियों से प्रश्न पूछना पड़ा भारी, बीसीसीएल के अधिकारियों ने घर से निकालने के लिए उसके पिता को थमाई पर्ची, पूरा परिवार शोक में डूबा
धनबाद की घटना है। एक 28 वर्षीय युवा आरटीआई एक्टिविस्ट महेश कुमार हैं। जिसकी दोनों किडनी खराब हैं। किडनी दोनों खराब हो जाने से महेश का पुरा परिवार तबाह है। स्थिति ऐसी है कि उसके पास समुचित इलाज तक के पैसे नहीं हैं। घर चलाने को भी फूटी कौड़ी नहीं हैं। लेकिन युवा आरटीआई एक्टिविस्ट समाज के प्रति जिम्मेदार व्यक्ति भी हैं। इस युवा आरटीआई एक्टिविस्ट ने एक दिन कागज निकाले और पॉकेट से कलम और कुछ जानकारी बीसीसीएल के अधिकारियों से मांग ली।
अब बीसीसीएल के अधिकारियों को ऐसी सनक सूझी कि उन अधिकारियों ने आरटीआई एक्टिविस्ट महेश कुमार को सबक सिखाने की ठानी। सबक ये कि उसकी इतनी हिम्मत कैसे हो गई, वो भी जिसकी दोनों किडनी खराब है। जिसके पास खाने को पैसे नहीं और न रहने का ठिकाना। उसने बीसीसीएल अधिकारियों से आरटीआई कानून के तहत प्रश्न कैसे कर डाले? इसलिए बीसीसीएल के अधिकारियों ने सबक सिखाने के लिए एक पर्चा महेश के घर भिजवा दिया। अब वो पर्चा देख, महेश का पूरा परिवार तबाह है कि वो महेश का इलाज करवाएं, खाने को पैसे जुटाएं या मकान ढूंढे?
महेश के परिवार के लोगों को कहना था कि पहले जो बीसीसीएल के क्वार्टर में रह रहे थे तो कम से कम एक बात थी कि चलो रहने को तो हैं। लेकिन अब तो बीसीसीएलवालों ने तबाही मचाने की सोच रखी है। महेश को बीसीसीएल से सवाल करना ही महंगा पड़ गया है। आश्चर्य इस बात की है कि मकान खाली करने का पर्चा केवल महेश के परिवार को ही मिला है। बाकी उसके अगल-बगल रहनेवालों व्यक्ति को नहीं, जबकि महेश के परिवार जैसे, असंख्य लोग वहां रह रहे हैं, जो बीसीसीएल के क्वार्टरों पर अवैध रुप से रह रहे हैं। लेकिन बीसीसीएल के अधिकारियों की उन पर कृपा बरस रही हैं। क्योंकि ये लोग बीसीसीएल के अधिकारियों के कुकर्मों पर कोई सवाल नहीं उठाते। बल्कि समय-समय पर जय-जय किया करते हैं।
वरिष्ठ समाजसेवी विजय कुमार झा, सोशल साइट फेसबुक पर लिखते हैं कि आरटीआई एक्टिविस्ट महेश, जिसकी दोनों किडनी खराब हैं, जिसका पूरा परिवार महेश की बीमारी से परेशान है। उस महेश ने बीसीसीएल से आरटीआई कानून के तहत जानकारी क्या मांगी, बीसीसीएल ने उसे घर से निकालने का पर्चा थमा दिया। महेश के साथ बीसीसीएल की ज्यादती व उसके साथ हो रहे नाइंसाफी को देखिये, महेश कुमार की दोनों किडनी ख़राब हो चुकी थी। पीजीआई चंडीगढ़ में किडनी ट्रांस्प्लांट कराने के उपरांत अभी भी पीजीआई चंडीगढ़ से ईलाज जारी है।
आरटीआई क़ानून के तहत महेश ने बीसीसीएल से कुछ जानकारी माँगी थी, उस आवेदन से चिढ़ कर इनके पिताजी को जो पूर्व में बीसीसीएल कर्मी थे। उन्हें १५ दिन के अंदर घर ख़ाली कर देने का फ़रमान जारी कर दिया। सिर्फ़ एक आदमी को, जबकि सभी को पता है कि बीसीसीएल के हज़ारों मकान को ग़ैर बीसीसीएल कर्मी ने क़ब्ज़ा कर रखा है। इस कार्रवाई के पीछे जो अधिकारी लोग हैं, उन्हें पता है कि वर्तमान में घर से बेघर किए जाने का तनाव झेलने की स्थिति में महेश और उसका परिवार बिलकुल भी नहीं है।
महेश के साथ कोई भी अनहोनी हो सकती हैं। ऐसी परिस्थिति में तो घटना की पूरी ज़िम्मेवारी बीसीसीएल की तय की जानी चाहिए। क्योंकि यह जान बूझकर की गई साज़िश प्रतीत होती है। यह ना सिर्फ़ अपने पद का दुरुपयोग का मामला है बल्कि अति संवेदनहीनता को भी दर्शाता है। इस पूरे मामले का संज्ञान लिया जाना चाहिए। जिससे की एक आरटीआई कार्यकर्ता के और उसके परिवार के सभी लोगों के मान-सम्मान और प्राणों की रक्षा की जा सके, यदि महेश के साथ कुछ भी अनहोनी होती है, तब अधिकारी पर इरादतन हत्या का मुक़दमा और अपने पद का दुरुपयोग का मुक़दमा चलना चाहिए।