राजनीति

मामला ऊर्जा विभाग का, सरकार कहती है कि 25/- प्रतिदिन के हिसाब से मिलनेवाली हर्जाना को किसी ने मांगा ही नहीं, इसलिए सरकार ने नहीं दिये, तो सरकार बताएं कि जो बच्चा नहीं रोता, वो क्या दूध नहीं पीताः सत्येन्द्र नाथ तिवारी

झारखण्ड विधानसभा के बजट सत्र के आज 14वें दिन सदन सात मिनट विलम्ब से शुरु हुआ। प्रश्नकाल शुरु होते ही सत्येन्द्र नाथ तिवारी का नाम स्पीकर ने पुकारा। सत्येन्द्र नाथ तिवारी का सवाल उर्जा विभाग से संबंधित था। सत्येन्द्र नाथ तिवारी ने पूछा था कि क्या झारखण्ड में झारखण्ड बिजली वितरण निगम लिमिटेड या अन्य बिजली वितरण कंपनियां ट्रांसफार्मर खराब होने की स्थिति में शहरी क्षेत्र में पांच घंटे एवं ग्रामीण क्षेत्र में 24 घंटे के अंदर ठीक कर देती है। सरकार का उत्तर था शहरी क्षेत्र में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र में 48 घंटे के अंदर ठीक करने का मानक निर्धारित है।

सत्येन्द्र नाथ तिवारी का दूसरा सवाल था कि क्या वर्णित समय के अंदर खराब ट्रांसफार्मर ठीक नहीं होने पर उपभोक्ताओं को 25 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से हर्जाना देना पड़ता है। सरकार का कहना था कि अगर कोई उपभोक्ता दावा करता है तो उसे 25 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान करने का प्रावधान है। सत्येन्द्र नाथ तिवारी का कहना था सच्चाई यही हैं कि ज्यादातर गांवों में ग्रामीण अपना पैसा लगाकर ट्रेक्टर से ट्रांसफार्मर विभाग तक ले जाते हैं और जब पीआरडब्ल्यू में ट्रांसफार्मर बनकर तैयार हो जाता हैं तो फिर वहीं ग्रामीण उस ट्रांसफार्मर को लाकर अपने इलाके में लगवाते हैं, जिसमें कई दिन लग जाते हैं।

सत्येन्द्र नाथ तिवारी का कहना था कि सरकार कह रही है कि ट्रांसफार्मर लेट से लगने पर, जो दावा करते हैं, उन्हें 25 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान करने का प्रावधान है। लेकिन सरकार बताये कि अब तक इन्होंने कितने लोगों को भुगतान किया। सरकार के पास इसका उत्तर नहीं था, क्योंकि प्रावधान तो कर दिया गया, लेकिन भुगतान किसी का नहीं हुआ, क्योंकि किसी ने दावा ही नहीं किया, सरकार के अनुसार जो दावा करता, उसे दिया जाता। सत्येन्द्र नाथ तिवारी ने कहा कि क्या जो बच्चा नहीं रोता, वो दूध नहीं पीता। सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं था।

टू द प्वाइंट सवाल करना ही ठीक रहेगाः हेमलाल मुर्मू

सत्येन्द्र नाथ तिवारी के सवाल-जवाब के क्रम में ही हेमलाल मुर्मू ने सूचना के तहत स्पीकर से अपनी नाराजगी प्रकट की। उन्होंने कहा कि माननीय टू द प्वाइंट सवाल नहीं करते, जिसके कारण कई लोगों के प्रश्न छूट जा रहे हैं। स्पीकर से अनुरोध होगा कि वो माननीयों को हिदायत दें कि वो टू द प्वाइंट सवाल करें, ताकि उसका जवाब भी टू द प्वाइंट मिले और सरकार को जवाब देने में भी आसानी हो।

मंईयां सम्मान योजना का मामला नीरा यादव ने उठाया

इधर नीरा यादव ने मंईयां सम्मान योजना को लेकर सवाल पूछे। नीरा यादव का कहना था कि क्या यह बात सही है कि बिना सत्यापन के मंईयां सम्मान योजना की शुरुआत तीन किस्तों में विधानसभा चुनाव के पूर्व कर दी गई और अब सरकार विभागीय पदाधिकारी पर कार्रवाई न कर, आम लाभुकों पर कार्रवाई करने जा रही है।

सरकार का कहना था कि प्रशासन के विभिन्न स्तरों पर विहित प्रक्रियाओं के अनुपालन के साथ अभियानगत एवं समयबद्ध प्रयासों से अधिकाधिक अहर्ताधारी लाभार्थियों को जांचोपरांत स्वीकृति देते हुए डिजिटल मोड में लाभार्थियों के खाते में प्रोत्साहन राशि दी गई। अब योजना का लाभ सही लोगों को मिले इसके लिए नियमसम्मत तरीके से भुगतान कराया जा रहा है। सही लाभार्थियों को इसका लाभ मिलें, इस निमित्त पुनःसत्यापन कराया जा रहा है।

ऊर्जा विभाग में कार्यरत मानव दिवस कर्मियों को नियमित करने का विचार नहीं

आलोक कुमार चौरसिया ने सरकार से सवाल पूछे कि क्या झारखण्ड प्रदेश में विगत 14 वर्षो से सेवा दे रहे झारखण्ड उर्जा विकास निगम लिमिटेड में कार्यरत मानवदिवस कर्मियों को पुरानी व्यवस्था के तहत बहाल करते हुए सामान्य काम के बदले सामान्य वेतन तथा ईपीएफ और ईएसआईसी सुविधा देने पर विचार रखती है। सरकार का कहना था कि इस संबंध में संप्रति सरकार के समक्ष कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं हैं।

जन वितरण प्रणाली दुकानदार को प्रतिमाह निश्चित आय निर्धारित करने का कोई प्रावधान नहीः इरफान

शत्रुघ्न महतो का सवाल था कि क्या खाद्य, सार्वजनिक, वितरण, एवं उपभोक्ता मामले विभाग बतायेगा कि राज्य के पीडीएस दुकानदारों द्वारा कमीशन बढ़ाकर 300 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग लंबे समय से की जा रही है, क्या ये बात सही है कि गुजरात, केरल सहित अन्य राज्यों में 20,000 रुपये प्रतिमाह की निश्चित आय निर्धारित की गई है?

मंत्री इरफान अंसारी का कहना था कि विभिन्न जन वितरण प्रणाली दुकानदार संघ द्वारा कमीशन बढ़ाने संबंधी किये गये मांग के आलोक में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम एवं झारखण्ड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के तहत खाद्यान्न वितरण कार्य के लिए जन वितरण प्रणाली दुकानदारों को देय डीलर कमीशन की राशि 100/- प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 150/- प्रति क्विंटल कर दिया गया है।

रही बात गुजरात व केरल के तर्ज पर सुविधा देने की बात तो ऐसी सूचना उनके पास उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही लक्षित जन वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश द्वारा निर्देशित है। उक्त आदेश में जन वितरण प्रणाली दुकानदार को प्रतिमाह निश्चित आय निर्धारित करने का कोई प्रावधान नहीं हैं।

रोटेशन सिस्टम के माध्यम से अनाज का उठाव व बिलिंग होती, इस कारण भुगतान किश्तों मेः हेमन्त सोरेन

खाद्य आपूर्ति मामले विभाग से ही संबंधित सवाल जयराम महतो ने भी पूछे। जयराम महतो का कहना था कि सरकार किसानों द्वारा खरीदे गये फसलों की राशि का भुगतान किश्तों में करती हैं। इसके कारण किसानों को भुगतान प्राप्त करने में देरी हो जाती हैं, तो सरकार देरी होने के कारण किसानों को ब्याज सहित राशि का भुगतान क्यों नहीं करती।

मंत्री का जवाब था कि ऐसा संभव नहीं हैं। किसानों से फसल प्राप्त करने से लेकर अन्यान्य प्रक्रियाओं में समय लगता हैं। एकमुश्त भुगतान भी किसानों को इसी कारण नहीं किया जाता। अगर एकमुश्त भुगतान किया जायेगा तो इससे बिचौलिये लाभ ले लेंगे। भ्रष्टाचार बढ़ेगा, समस्याएं बढ़ेगी।

जब मंत्री इरफान जयराम महतो के प्रश्नों का जवाव दे रहे थे, तो सदन में इसी दौरान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने हस्तक्षेप किया और कहा कि रोटेशन सिस्टम के माध्यम से अनाज का उठाव व बिलिंग होती हैं। ये निरन्तर चलनेवाली प्रक्रिया है। फेज बाई फेज यह चलता रहता है। इसलिए पैसों का भुगतान किश्तों में होता हैं, एकमुश्त होना संभव नहीं। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के इन बातों पर जयराम महतो संतुष्ट दिखे।

हेमलाल मुर्मू ने ग्रामीण क्षेत्रों में भंडारण सुविधा का मामला सदन में उठाया

हेमलाल मुर्मू का प्रश्न था कि क्या सरकार राज्य के प्रत्येक जिले या प्रखण्ड में किसानों द्वारा उत्पादित फसलों, सब्जियों और दलहन आदि उत्पादों की उत्पादन बढ़ाने, भंडारण सुविधा की उन्नयन एवं विकास, ग्रामीण मंडी और संग्रहण केन्द्रों के विकास एवं स्थापना के लिए राशि आवंटित एवं खर्च करने का विचार रखती है?

सरकार का जवाब था कि राज्य योजनांतर्गत पांच एमटी क्षमता के 109 यूनिट सौर ऊर्जा चालित मिनी कोल्ड रूम निर्मित हैं। राज्य योजनांतर्गत 30 एमटी क्षमता के 107 कोल्ड रूम निर्मित हैं। राज्य के विभिन्न जिलों में शीत गृह निर्माण योजनांतर्गत कुल 20, 5000 एमटी क्षमता के शीत भंडार गृह का निर्माण कराया जा रहा हैं।

जिसमें से सात का निर्माण पूर्ण हैं। राज्य योजनांतर्गत लैम्पस/पैक्स में 1553 गोदाम है। जिसकी क्षमता 168550 एमटी है तथा वित्तीय वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में कुल 1543 गोदाम का निर्माण प्रक्रियाधीन है, जिसकी क्षमता 253500 एमटी होगी।

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