झारखण्ड विधानसभा में विधायकों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर समाप्त, अनुपस्थित रहनेवाले विधायकों की संख्या 70 पार, कांफ्रेस हॉल में खाली कुर्सियों पर विधानसभाकर्मियों ने बैठकर शिविर की बचाई लाज
झारखण्ड विधानसभाध्यक्ष द्वारा विधायकों के लिए आयोजित दो दिवसीय विशेष प्रबोधन सह प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन की स्थिति पहले दिन की अपेक्षा और दयनीय हो गई। पहले दिन 59 विधायकों ने इस प्रशिक्षण शिविर से दूरियां बनाई थी और आज इसकी स्थिति इतनी दयनीय हो गई कि आप उपर दिये गये फोटों से ही गिनती करके अनुमान कर लें, तो ज्यादा बेहतर होगा। आज अनुपस्थित रहनेवाले विधायकों की संख्या 70 को भी पार कर गई।
आज विशेष प्रबोधन सह प्रशिक्षण शिविर के अंतिम दिन तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया था। जिसमें झारखण्ड विधानसभा के माननीय सदस्यों ने भाग लेना उचित नहीं समझा और इसके जगह पर अपने लोगों के बीच में ही ज्यादा समय गुजारना उचित समझा। स्थिति यह रही कि इस तकनीकी सत्र की इज्जत बचाने के लिए विधानसभा के वरीय अधिकारियों ने दिमाग लगाया और तकनीकी सत्र के दौरान वे विभिन्न कुर्सियों पर जमे रहे।
राजनीतिक पंडितों की मानें, तो यह प्रशिक्षण शिविर सही मायनों में माननीयों के लिए ही था। विधानसभा में वे कैसे अपनी बातों को सही ढंग से रख कर, उसका उचित लाभ उठा सकते हैं। इसी के लिए आयोजित था। लेकिन सत्तापक्ष हो या विपक्ष किसी ने इसमें रुचि नहीं ली। कुल मिलाकर इस प्रशिक्षण शिविर का कोई प्रतिफल नहीं निकला।
पूर्व विधानसभाध्यक्ष रहे सीपी सिंह इस पूरे प्रकरण पर कहते हैं कि अच्छा रहता कि छुट्टियों के दिन की जगह चलते सत्र में ही कुछ घंटों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाता तो इसका लाभ सभी दलों के विधायक उठा लेते। लेकिन चूंकि यह प्रशिक्षण शिविर शनिवार और रविवार को आयोजित था और ये दोनों दिन छुट्टियों के होते हैं। ऐसे में एक विधायक के लिए इन दिनों में जनता के बीच रहना ज्यादा जरुरी होता है।
सीपी सिंह इसी पूरे प्रकरण पर अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहते है कि जब वे पहली बार विधायक बने थे और उन्हें पटना में इसी प्रकार के कार्यक्रम में शामिल होना पड़ा और वे रांची में उन दिनों नहीं थे, तो ज्यादातर जनता यहीं कही थी कि जाइये पटना में ही रहिये, रांची की जनता से आपको क्या मतलब? दरअसल जनता क्या जानती है कि एक विधायक को उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम में रहना कितना जरुरी है?
यहीं कारण है कि एक विधायक इस प्रकार के कार्यक्रम से ज्यादा जरुरी छुट्टियों के दिनों में अपने क्षेत्र में रहना ज्यादा जरुरी समझता हैं, क्योंकि अंत में उसे जवाब जनता को देना होता है, किसी प्रशिक्षक को नहीं या कार्यक्रम आयोजित करनेवालों को नहीं। इसलिए दो दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में माननीयों की अनुपस्थिति से उन्हें कोई हैरानी नहीं, ये सामान्य सी बात है।