वक्फ संशोधन बिल झारखण्ड में थोपने की जरुरत नहीं, राज्य की सहमति के बिना कोई भी नियम यहां लागू नहीं होगा, झारखण्ड की एक इंच जमीन भी प्रधानमंत्री और उनके करीबियों के हाथों में जाने नहीं देंगेः सुप्रियो
झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय महासचिव व प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने आज संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हमारी पार्टी ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों में वक्फ संशोधन बिल का विरोध किया है, क्योंकि हम इसे अच्छा नहीं मानते। हमारे राज्य में इसे थोपने की जरुरत नहीं। हम शांतिपूर्ण राज्य है। राज्य की सहमति के बिना कोई भी नियम लागू नहीं होगा, क्योंकि ये आपातकालीन काल नहीं हैं। हमारी पार्टी स्पष्ट कर देना चाहती है कि झारखण्ड की एक इंच जमीन भी प्रधानमंत्री और उनके करीबी लोगों के हाथों में जाने नहीं दी जायेगी।
उन्होंने कहा कि देश के प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्षता शब्द का उल्लेख है। पूरे विश्व में हमारा देश, ऐसे देश के रूप में जाना जाता है, जहां सर्व धर्म समभाव के अस्तित्व में सभी लोग रहा करते हैं। लेकिन देखा जा रहा है कि पिछले दस वर्षों में लगातार इन चीजों को बिगाड़ा जा रहा है। पहले संवैधानिक संस्थाओं पर इनका आक्रमण होता है। फिर उन पर कब्जा कर लिया जाता है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्तों तक को नहीं बख्शा जाता। न्यायालय तक को प्रभावित किया जाता है। जो न्यायाधीश सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हैं। उन्हें उपकृत करते हुए राज्यसभा का सदस्य तो कभी किसी राज्य का राज्यपाल बना दिया जाता है। ले-देकर ये नया ट्रेंड अपने देश में चला है। देश को संवैधानिक नहीं, बल्कि अंधविचारवाद में ढकेल दिया गया है। देश की सामाजिक समरसता को बर्बाद कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि वक्फ एक ऐसा संपत्ति होता है, जिसकी स्थिति हर धर्मों में हैं। जैसे हिन्दूओं में कोई अपनी जमीन जब मंदिर को देता हैं तो वो जमीन देवभूमि जमीन कहलाती है। कोई धार्मिक संस्थाओं को देता हैं तो वैसी जमीन आश्रम या मठ का रूप ले लेती है। उसी प्रकार इस्लाम में भी एक चैरिटी की तरह वक्फ चैरिटी भी है। इसी प्रकार की चैरिटी की अवधारणा सभी धर्मों में हैं। लेकिन यहां हर चीज में घालमेल किया जाता है।
सुप्रियो ने कहा कि ये हम भी जानते है कि हर धर्म में कुछ शरारती तत्व होते हैं। जो ये दान की चीजें होती हैं। उसे भी बेच देते हैं। ये हर मठ-मंदिर, उसमें वक्फ को भी आप ले सकते हैं। इसमें धनाढ्य वर्ग लाभान्वित होता है। वक्फ बोर्ड की जमीन रेलवे और सेना की जमीन के बाद तीसरे नंबर पर आता है, यानी कुल नौ लाख संपत्तियां हैं और उत्तर प्रदेश में इसकी संपत्ति 27 प्रतिशत है। साथ ही खेल भी यहीं से शुरु होता है कि संपत्ति पर किसका कब्जा?
सुप्रियो ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इसी पर ज्यादा नजर है। हम जानते है कि पीएसयूएस को उनके मित्रों के बीच बांट दिया गया। जिसमें रेलवे की जमीन भी शामिल है। हमारे देश के कई किलोमीटर जमीन को चीन ने कब्जा कर रखा है। लेकिन उस पर आज तक कोई बात नही होती। लेकिन जो सॉफ्ट टारगेट धार्मिक अल्पसंख्यक है। उनकी जमीन को अपने लोगों तक कैसे पहुंचाना है, उस पर खुब बात होती है। जिसकी तैयारी वक्फ संशोधन बिल के साथ की जा रही है।
सुप्रियो ने कहा कि हालांकि लैंड राज्य का विषय है। फिर भी सेन्ट्रल वक्फ मैनेजिंग कमेटी के साथ-साथ राज्यों में भी वक्फ बोर्ड है। हमारे राज्य में भी वक्फ बोर्ड है। उसका सीओ राज्य का होता है। जब उस पर विवाद होती हैं तो उस पर एक्शन डीसी लेता है। ताकि जमीन का मिस यूज न हो। लेकिन यहां मिसयूज की बात भी अब कहां हो रही हैं। अब तो सीधे इसे डिफ्यूज कर दिया गया है। वो भी इसलिए कि इस जमीन को दूसरे को देना है। इस पूरे संशोधन पर राज्य सरकारों से राय तक नहीं ली गई। अब भूमि पर विवाद होगा तो लॉ एंड आर्डर का मामला आयेगा। जमीन किसकी राज्य की, लॉ एंड आर्डर भी राज्य का विषय। मतलब इन दोनों विषय जो राज्य के हैं। उसे केन्द्र अपने हाथों में लेना चाहती है।
सुप्रियो ने कहा कि जरा इस केन्द्र सरकार की नीयत को देखिये। वो यह मुद्दा कब लाई है। जब देश में नवरात्र चल रहा है। मूल उद्देश्य इनका धार्मिक उन्माद पैदा करना है। हम देश में सामाजिक सद्भाव चाहते हैं। लेकिन वे देश को एक रखना नहीं, बल्कि बांटना चाहते हैं। पूराने जमाने में 1950 में ही यह तय हो गई थी कि 1947 की स्थिति वक्फ पर कायम रहेगी। उसके बाद से कोई वक्फ को लेकर घटना भी नहीं घटी। लेकिन इन दस वर्षों में घट गई। ये बेरोजगारी, महंगाई आदि ज्वलंत मुद्दों पर बात नहीं करना चाहते। अमेरिका ने टैरिफ बढ़ा दिया। ये उसके आगे नतमस्तक हो गये। ये इसी भटकाव के लिए वक्फ संशोधन बिल लाया गया।
उन्होंने कहा कि दस सालों में भाजपावालों ने अपनी संपत्ति बढ़ा ली। हरमू रोड में भाजपा का कार्यालय देख लीजिये। आगे-पीछे, उपर नीचे बढ़ता चला गया और वक्फ जब अपने जमीन पर स्कूल-कॉलेज, मुसाफिरखाना, अस्पताल खोलना चाहता है तो इन्हें दिक्कतें आ रही हैं। झामुमो चाहती है कि नाइंसाफी किसी के साथ न हो। इसका ध्यान रखा जाना चाहिए।